tss hindi poetry चेहरा

मेरे हिस्से का दर्द

  पीड़ा झेलती मेरी अनुभूतियाँ और झेलते हैं दर्द मेरे शब्द भी, तब जाकर कहीं रचित होती है मेरी व्यथा की कविता |   घुमड़ते मेघों - आषाढ़ बनकर ही रहो सावन बनकर मत बरसो इन आँखों से, रुपहले तारों से कह दो मत झाकेँ असमय इन श्याम सुनहरी अलकों...Read More