tss hindi poetry चेहरा

चेहरा: Ghazal

    मेरे ख्यालों का सागर अगर गहरा होता, लहरों तले तूफ़ां सा एक ठहरा होता ! चिराग यादों के मैंने जो जलाये होते, स्याह रातों का रंग कुछ तो सुनहरा होता ! जो चाँद आसमान में न ऐसे इठलाता, चकोर का पुराना ज़ख्म ना हरा होता ! एक परवाज़...Read More
Safe from words: haiku poem

जिजीविषा…

क्या हुआ जो जिंदगी की शाम आनी है, धुप्प अँधेरे से तो अपनी गहरी सानी है ! अभी तो स्वर में दर्द का संगीत बाकी है मारवा के राग का एक गीत बाकी है! तारसप्तक का अभी वो तान बाकी है सुरों से अब भी मेरी पहचान बाकी है !...Read More