Safe from words: haiku poem

जिजीविषा…

क्या हुआ जो जिंदगी की शाम आनी है, धुप्प अँधेरे से तो अपनी गहरी सानी है ! अभी तो स्वर में दर्द का संगीत बाकी है मारवा के राग का एक गीत बाकी है! तारसप्तक का अभी वो तान बाकी है सुरों से अब भी मेरी पहचान बाकी है !...Read More