आरम्भ

cactus flowers आरम्भ


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यह अंत का आरम्भ है!
समय के नित-निरंतर घूमते,
अभिशप्त चक्र का
एक नया प्रारम्भ है!

कोहरे को भेद सरपट दौड़ती
काली सड़क ने ली है चुनौती
धप्प, श्वेत धुंध की,
कहती, “भय तो है बस
नाममात्र का एक विचार,
मन का है बस एक विकार!

धुएं के पीछे की वो काल्पनिक आग है,
रूंधते गले से गाया बेसुरा सा राग है!
मन में उठती कुछ सुनी सी आवाज़ है
तार जिसके ज़ोर से हैं खिंच गए
वह बिगड़ा हुआ सा साज़ है!”

पर, उँगलियों से बस छूकर
देखो तो एकबार
मखमल सा स्पर्श,
अवांछित संघर्ष है!

क्यों इस भय के हाथों की
कठपुतलियां बनकर, हम फंसे हैं
समय के इस नित निरंतर चक्र में?
सीधी सड़क को नापते क्यों वक्र में?

काली सड़क ने ली चुनौती
घने श्वेत धुंध की
अब न डरना हैं मुझे,
अब भी गाना हैं मुझे
क्या हुआ जो आवाज़ मेरी
अब भी हैं रुन्धती!

Every end embarks new beginnings, so the sad end of 2017 brings in fresh starts of an all new year. Here’s The Style Symphony wishes you a very happy new year 2018 with a poem of hopes!
This dying year brings in hopes…hopes that I could live a fearless life…

HAPPY NEW YEAR

 

  • Jayanthi Parthasarathy

    bahut khoob <3 <3 <3
    you are so talented !!!

  • Indrani

    Very nice lines! Wish you all a very happy new year!

  • Very intense poem… totally loved it

  • Madhusudan Mahawar

    Loved reading it!
    Bahut hi Khoobsurat kavita!

  • Jyotirmoy Sarkar

    Zindagi ki kuchh sachchaio ko batate huye ek bahot hi Inspirational poetry hai, loved it a lot.