The Style Symphony

वो बात अब भी बाक़ी है : Ghazal

[caption id="attachment_5613" align="aligncenter" width="333"] PC: Pinterest[/caption] मेरे लफ़्ज़ों में अब भी वो ख़लिश बाक़ी है, कि उफ़ भी करूँ तो पिघलता है फ़लक.   डूबती शाम का अब भी वो पहर बाक़ी है, कि गर्द-ए-रहगुज़र घबराकर जाती है ठिठक.   उम्र-ए-दरिया में अब भी वो लहर बाक़ी है, वक़्त की...Read More
Chrysanthemum flower ghazal

तलाश: Nazm

    परत दर परत उधेड़ा खुद को पंखुड़ियों की तरह तमाम हो गई   कागज़ पे लिखे हर्फ़ों में ढूँढा ख़ुद को मग़र कहानी मेरी आज सरेआम हो गई   कुछ तो बात थी ज़माने की तानाकशी में ख़ुद को ढूंढने की कोशिश सुबहो-शाम हो गई   बस दो...Read More
ghazal

अब और नहीं : ग़ज़ल

Her spirit craves to come out of the shell and strives for the sky of her share! My Ghazal portrays the plight of a woman in search of her true self and identity. [caption id="attachment_5675" align="aligncenter" width="397"] PC: https://s-media-cache-ak0.pinimg.com/[/caption] पथरीली  ज़मीं पे राहतें अब और नहीं, तपिश में जले पाँव,...Read More
kavita

कविता कहूँ या ग़ज़ल

For me, Hindi poetry (kavita) is a way of expressing my soft yet strong emotions. But similar feelings when conveyed through a ghazal, turn more romantic, beautiful and compact. Here’s how I tried to emote in both the ways. कविता मैंने धीमे से कुछ कहा सरसराती पत्तियों से, मेरे शब्द...Read More
The Style Symphony

एक शिकायत: Ghazal

हर सितम हम सह गए, पर सिसकियों की भी इजाज़त ना मिली, अश्कों का दरिया मिला, दामन भिगोने की नज़ाकत ना मिली | आज हर चेहरा यहाँ ओढ़े हुए, मासूमियत का है नक़ाब, यह शरीफों का जहाँ, पर देखने को भी शराफ़त न मिली | कोई नाउम्मीदगी भी दे ना...Read More

गुमराह: Ghazal

I have written this Hindi poem after a long gap. When the pain is inevitable, my feelings get intense and expressions commemorate in a way, that's obviously Hindi poetry. [caption id="attachment_4108" align="aligncenter" width="359"] PC: www.etsy.com[/caption] कुछ शोख़ रंग बदरंग हुए, कुछ सुर्ख़ ख़्वाब भी ख़ाक हुए, रचकर जोड़े जो रिश्ते...Read More
tss hindi poetry

फ़ना के बाद: Ghazal

अश्के-सागर में डूबने से ज़रा शोर तो होगा, मेरी इस ख़ुदकुशी पे रोया कोई और तो होगा | रास्ते सुनसान हैं, मेरी मंज़िल भी दूर है, सांस लेने को बियाबां में कहीं ठौर तो होगा | दुश्मनी ही सही, कोई तो रिश्ता हो कम से कम, दुश्मन हुआ तो क्या,...Read More
tss hindi poetry

हसरतें: Ghazal

कम से कम हमसे किसी को कुछ गिला तो है, शुक्र है कि आज कोई ग़ुल खिला तो है | माना कि इस तरफ नहीं था रुख़ हवाओं का, एक ही सही, कोई पत्ता हिला तो है | हमसफ़र नहीं तो क्या, तकदीर है मेरी, बेवफ़ा भी संग, दो कदम...Read More
tss hindi poetry

मंज़िलें: Ghazal

वक़्त ने करवट बदली और आईने बदल गए, चेहरे के शिकन बदले, ज़िन्दगी के पैमाने बदल गए | कुछ इस तरह से हम लिखते रहे रात भर की सुबह हुई और लफ़्ज़ों के मायने बदल गए | मीलों चले हम अपनी हसरतों के संग-संग, हम देखते ही रह गए और...Read More
tss hindi poetry

ख़्वाहिशें: Ghazal

कहने को बहुत कुछ है, पर आग़ाज़ ना मिला, पंख हैं अब भी मगर, परवाज़ ना मिला | बिखरे हुए सरगम मैं सजाती रही ताउम्र, सुर तो हैं सजे हुए, पर साज़ ना मिला | हज़ार ख़्वाहिशें सिरहाने रख, सोयी थी कल रात, बस ज़माने को दिखाने का अंदाज़ ना मिला...Read More