सपने

सपने

  सपने............ अनगिन, अबूझ, अल्हड सपने, रत्ती भर गुंजाईश वाले बित्ते भर के सपने, मुट्ठी में बंद सुन्दर तितलियों से फड़फड़ाते दम तोड़ते, न रह पाए जो अपने, सपने ! और कुछ कलाबाज़, हवाबाज़ सपने, जंज़ीरें तोड़, छूते आसमानों की बुलंदियां, हाथ आये बाज़ों से वीभत्स सपने ! बूते से...Read More
ऐ मित्र

ऐ मित्र !

कुछ अंतर्मन की बातें , कुछ टूटे फूटे सपने बांटा करती हूँ तुम संग ऐ मित्र ! फिर होकर भी तुम गैर लगते हो अपने अपने !     कुछ गहरी काली रातें, कुछ अंतहीन से किस्से, साझा करती हूँ तुम संग ऐ मित्र ! फिर झीनी चादर से छनकर...Read More
moon girl

स्याह रात का चाँद

  आती वह हर रात मुझसे मिलने ले जाती मेरी नींद, मेरे सपने बदले में रात का वेश बदल, स्याह चादर में लिपटी आती वो,  रंग जाती मैं भी उसके ही रंग में | रात ही तो थी, काली, विस्मयकारी, मेरे हर प्रयास के बाद भी मुझपर भारी | मुझसे ही...Read More
holi

ये कैसी होली? : A Tanka on Holi

[caption id="attachment_6708" align="aligncenter" width="584"] PC: http://s6.favim.com/[/caption] ये कैसी होली? मैंने रंगेपुते चेहरों की हर भाषा पढ़ ली सत्ता के दम्भ में रंगी होली, बस उनकी हो ली |   रंगरूटों ने फिर पहने, अजनबी चेहरे ये कैसी होली? हमने अपने अरमानों की होलिका जला ली |   हरे, पीले और...Read More
deceit

Deceit: छल

Deceit, deception, fraud, falsehood — there are numerous synonyms of that bad, we hate a lot. But sometimes, even the most virtuous person has to play deceptive when life turns out to be a mayhem. In the battle of Mahabharata, Lord Krishna played deceptive tricks several times to safeguard the...Read More
radha krishna painting

यात्रा (Yatra)

[caption id="attachment_4318" align="aligncenter" width="648"] 'Radha Krishna' by Maitreni Mishra[/caption] मेरी यात्रा अविरल, हर पल मैं चली छोड़ ऐश्वर्य, महल मुड़कर देखा बस एक बार कुछ टूटा था, जो छूटा था मैं आहत थी और शब्दहीन, तुम मुखर बड़े और प्रखर खड़े | कुछ कहा-अनकहा बाकी था मैं कह न सकी,...Read More
The Style Symphony

अस्मिता

  यथार्थ की अँधेरी, पथरीली कंदराओं में युगों से अभिशप्त, एकाकी मैं, तलाशती अपना अस्तित्व | अधूरी मैं, अधूरी मेरी यात्रा और एक अंतहीन मार्ग जहाँ  तमस की कौंध से चुंधियाती हैं आँखें |  कानों को बहरा करता है सन्नाटे का शोर, कलियाँ चुभती हैं और बींधती हैं मेरे रोमछिद्रों...Read More
shabd words शब्द

शब्द (Words)

Please... Sorry... Thank You...   .......the sweetest man-made gestures ever found in the world of words! Reciprocation of these beautiful words build strong relations. Words are the most powerful medium of communication in this era of social media as well as socialization in our own surroundings. Words can break the...Read More
tss hindi poetry

अनुभूति और अभिव्यक्ति

कल्पनाओं के पाँखी उड़ गए, संभावनाओं के पंख पसार| बंजर मन की परती में, अंकुरने से, भावनाओं ने किया इन्कार| यथार्थ की दुपहरी, बिखेर गयी, धूप, कर्कश जेठ सी| वर्जनाओं में जकड़ी मैं, बह न सकी, मुठ्ठी में बंद रेत सी| अनुभूति, कोई नागफनी का पौधा नहीं और कांटे हैं नहीं...Read More
धुरी और परिपथ

धुरी और परिपथ

पृथ्वी का घूमना अपनी धुरी पर या फिर एक निश्चित परिपथ में परिक्रमा सूर्य की, — विज्ञान के इस सत्य को जीने की नियति है मेरी भी निरंतर.... अपनी अस्मिता की तलाश में आत्मकेन्द्रित होकर स्वयं की धुरी पर घूमना और कर्तव्यों की आकाशगंगा में नियति द्वारा तय एक अज्ञात,...Read More
ममता का आँचल

ममता का आँचल

ममता के आँचल से सींचा है किनारा, मृदुल जल के दर्पण में मिला है सहारा | उन्नति पर अग्रसर वो राह डगमगाती थी, डाँट से जब डरकर हर रूह काँप जाती थी, संध्या में दिया जलाकर किया जीवन जगमग सारा| पक्षियों के पर लगाकर दिया व्योम को स्वर्णिम तारा ||...Read More
अक्स

अक्स और आँखें

[dropcap]W[/dropcap]hen she was born,everyone said that she didn't look like me! But I made her my replica with time. :-) This poem is dedicated to my daughter [highlight]Maitreni[/highlight]. जब तुम आई, कहा सबने मेरा अक्स नहीं दिखता तुममें | मुस्कान तुम्हारी मुझ सी नहीं और आँखों में थे भाव नए,...Read More
tss hindi poetry

रात की स्याही

  बोझिल शामें, ऊंघती रातें................, आहत आँखों की साज़िश से हर साँस बिखरती है, कतरा-कतरा होकर मेरी आवाज़ बहकती है, रात मुझसे ही होकर हर रात गुज़रती है,   फ़िर भी मेरी आँखों में नहीं नींद बसती है |    कानों को बींधता है जब सन्नाटे का शोर, जिस ओर मुझे...Read More
tss hindi poetry

मेरे हिस्से का दर्द

  पीड़ा झेलती मेरी अनुभूतियाँ और झेलते हैं दर्द मेरे शब्द भी, तब जाकर कहीं रचित होती है मेरी व्यथा की कविता |   घुमड़ते मेघों - आषाढ़ बनकर ही रहो सावन बनकर मत बरसो इन आँखों से, रुपहले तारों से कह दो मत झाकेँ असमय इन श्याम सुनहरी अलकों...Read More