Thursday , 23 February 2017
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Hindi Poems

कविता कहूँ या ग़ज़ल

kavita

For me, Hindi poetry (kavita) is a way of expressing my soft yet strong emotions. But similar feelings when conveyed through a ghazal, turn more romantic, beautiful and compact. Here’s how I tried to emote in both the ways. कविता मैंने धीमे से कुछ कहा सरसराती पत्तियों से, मेरे शब्द थे अपर्याप्त … चीखें नहीं, बस शब्द थे कुछ क्षीण… मधुर , कुछ उन्नींदे से, क्षण- भंगुर पर नींदें उड़ गयीं कई जब हवाओं ने सुना, और उड़ा ले गयीं ... Read More »

Deceit: छल

deceit

Deceit, deception, fraud, falsehood — there are numerous synonyms of that bad, we hate a lot. But sometimes, even the most virtuous person has to play deceptive when life turns out to be a mayhem. In the battle of Mahabharata, Lord Krishna played deceptive tricks several times to safeguard the truth. He even forced Yudhishthir to speak a half truth half lie— “Ashvathama hato, naro wa kunjaro wa.” He misguided Guru Dronacharya about his son Ashvathama’s death. Though an elephant, ... Read More »

यात्रा (Yatra)

radha krishna painting

मेरी यात्रा अविरल, हर पल मैं चली छोड़ ऐश्वर्य, महल मुड़कर देखा बस एक बार कुछ टूटा था, जो छूटा था मैं आहत थी और शब्दहीन, तुम मुखर बड़े और प्रखर खड़े | कुछ कहा-अनकहा बाकी था मैं कह न सकी, तुम सुन न सके मैं कर न सकी कुछ अभिव्यक्त तुम सुन न सके कुछ अतिरिक्त बस स्वयं मेरा और अहम् तुम्हारा रह न सके सान्निध्य में | कभी मीलों तक थे तुम आगे और मैं सदियों तक दौड़ पड़ी ... Read More »

अस्मिता

The Style Symphony

यथार्थ की अँधेरी, पथरीली कंदराओं में युगों से अभिशप्त, एकाकी मैं, तलाशती अपना अस्तित्व | अधूरी मैं, अधूरी मेरी यात्रा और एक अंतहीन मार्ग जहाँ  तमस की कौंध से चुंधियाती हैं आँखें |  कानों को बहरा करता है सन्नाटे का शोर, कलियाँ चुभती हैं और बींधती हैं मेरे रोमछिद्रों को सुगंध से संक्रमण हो जाता है मुझे | फिर भी यह तलाश मेरी अस्मिता की, अविरल, अजेय चलती रहती सदियों से और शायद सदियों तक….| — संगीता मिश्रा  Read More »

शब्द (Words)

shabd words शब्द

Please… Sorry… Thank You…   the sweetest man-made gestures ever found in the world of words! And reciprocation of these beautiful words build strong relations. Words are the most powerful medium of communication in this era of social media as well as socialization in our own surroundings. Because, words can break the barriers of place, distance and time and could make powerful emotional connect. But, when words get weird, they not only break hearts but also relations. The poem portrays ... Read More »

अमूल्य

अमूल्य

Sometimes she’s being called a deity or sometimes being compared to priceless substances. But, a woman is always considered as an ‘object of desire’ and is expected to sacrifice for the sake of her family and society. She has to pay the price to be called ‘priceless’. This poem portrays the complexities and paradoxes of a woman’s life. आँखों की चकाचौंध, वैभव का प्रतीक, स्वर्ण | शायद अलग-अलग परिस्थितियों में अलग-अलग नियति झेलने को विवश | एक दक्ष जौहरी के ... Read More »

द्वय (Dualism)

क्यों

Bible says, this mankind is the result of the mistakes made by Eve in the Garden of Eden. When Eve tasted the forbidden fruit, she got tempted and provoked Adam to commit sin, resulting in her punishment of suffering from labour pain. Bible specifies carnal relationships as prohibited sins and states them the weakness of humans. Even in Hindu mythology Lord Shiva is portrayed as Ardhanarishwar (half man and half woman), the most powerful deity of this universe. This poem is ... Read More »

अनुभूति और अभिव्यक्ति

tss hindi poetry

कल्पनाओं के पाँखी उड़ गए, संभावनाओं के पंख पसार| बंजर मन की परती में, अंकुरने से, भावनाओं ने किया इन्कार| यथार्थ की दुपहरी, बिखेर गयी, धूप, कर्कश जेठ सी| वर्जनाओं में जकड़ी मैं, बह न सकी, मुठ्ठी में बंद रेत सी| अनुभूति, कोई नागफनी का पौधा नहीं और कांटे हैं नहीं अभिव्यक्तियाँ| अब कहो तुम ही की मेरी कल्पना, कैसे हो साकार ? — संगीता मिश्रा Read More »

तुम और मैं

तुम और मैं

I don’t worship and I’m being called an atheist, but I share a special bond with God which makes me see Him through the eyes of a friend than those of a follower. My special connection with the Almighty gets stronger despite all criticism of not being a believer. This poem portrays my special connect with Him. तुम ! निखिल विश्व, प्रकृति विस्तार अनादि, अनंत, सच्चिदानंद ! मैं? तुम्हारी तुलना में मेरा अस्तित्व ही क्या? तुम तो हो ज्ञान के ... Read More »

धुरी और परिपथ

धुरी और परिपथ

पृथ्वी का घूमना अपनी धुरी पर या फिर एक निश्चित परिपथ में परिक्रमा सूर्य की, — विज्ञान के इस सत्य को जीने की नियति है मेरी भी निरंतर…. अपनी अस्मिता की तलाश में आत्मकेन्द्रित होकर स्वयं की धुरी पर घूमना और कर्तव्यों की आकाशगंगा में नियति द्वारा तय एक अज्ञात, अबूझ परिपथ पर एक नियोजित सूर्य की यंत्रवत परिक्रमा सूर्य के प्रचंड और उद्विग्न ताप में झुलसने की विवशता तथा धुरी और परिपथ की दोहरी दौड़ में अपने आंसुओं तक ... Read More »

ममता का आँचल

ममता का आँचल

ममता के आँचल से सींचा है किनारा, मृदुल जल के दर्पण में मिला है सहारा | उन्नति पर अग्रसर वो राह डगमगाती थी, डाँट से जब डरकर हर रूह काँप जाती थी, संध्या में दिया जलाकर किया जीवन जगमग सारा| पक्षियों के पर लगाकर दिया व्योम को स्वर्णिम तारा || कहता है सूरज से सागर का सवेरा, तुम हर क्षण ऊर्जा से साथ देना मेरा | टूटी-बिखरी किश्तों में ह्रास होती ज़िन्दगी, स्वप्न टूटे, ख्वाब छूटे, मरणासन्न पड़ी | आक्रोश ... Read More »

अक्स और आँखें

अक्स

When she was born,everyone said that she didn’t look like me! But I made her my replica with time. 🙂 This poem is dedicated to my daughter Maitreni. जब तुम आई, कहा सबने मेरा अक्स नहीं दिखता तुममें | मुस्कान तुम्हारी मुझ सी नहीं और आँखों में थे भाव नए, मैंने ओढ़ ली वो नन्ही सी किरण और दिल के सारे घाव भरे | आँसू ये तुम्हारे हिस्से के अब मेरी आँखों से बहते तुम बोलो और मै निःशब्द मेरे ... Read More »

रात की स्याही

tss hindi poetry

बोझिल शामें, ऊंघती रातें……………., आहत आँखों की साज़िश से हर साँस बिखरती है, कतरा-कतरा होकर मेरी आवाज़ बहकती है, रात मुझसे ही होकर हर रात गुज़रती है, फ़िर भी मेरी आँखों में नहीं नींद बसती है |  कानों को बींधता है जब सन्नाटे का शोर, जिस ओर मुझे बुलाता, मैं चल देती उस ओर, सूरज जब अंगड़ाइयाँ लेकर उठता हर अगली भोर, तब जाकर कहीं मेरी आँखों में एक रात पसरती है, फ़िर भी मेरी आँखों में नहीं नींद बसती है ... Read More »

मेरे हिस्से का दर्द

tss hindi poetry

  पीड़ा झेलती मेरी अनुभूतियाँ और झेलते हैं दर्द मेरे शब्द भी, तब जाकर कहीं रचित होती है मेरी व्यथा की कविता | घुमड़ते मेघों – आषाढ़ बनकर ही रहो सावन बनकर मत बरसो इन आँखों से, रुपहले तारों से कह दो मत झाकेँ असमय इन श्याम सुनहरी अलकों से | क्यों शोषण करती हैं पंच-इन्द्रियाँ सारी ऊर्जा रहने दो बस एक स्पंदन मात्र मेरे मन के लिए भी | मेरे अंतर्मन पर पड़े निशान, इतना मत टीसो की सारे आँसु ... Read More »

उपहार: A Birthday Gift for You!

Happy Birthday Maitreni Mishra

Happy Birthday Sunshine! 🙂 What could I gift you on this Birthday as all what belongs to me is yours. Apart from all the love, care, concern and time, I have a treasure of words for you. Here they go…  सर्द हवाओं में अपने सपनों की गर्मी भर दूँ, शुष्क मौसम को आंसुओं की नमी से तर दूँ | स्वयं करूँ अपना ही अस्तित्व तार-तार , कि पा सको तुम विलक्षण व्यक्तित्व बेशुमार | मुट्ठी में बंद कर लूँ अहम् ... Read More »