चेहरा: Ghazal

tss hindi poetry चेहरा

 

 

मेरे ख्यालों का सागर अगर गहरा होता,
लहरों तले तूफ़ां सा एक ठहरा होता !

चिराग यादों के मैंने जो जलाये होते,
स्याह रातों का रंग कुछ तो सुनहरा होता !

जो चाँद आसमान में न ऐसे इठलाता,
चकोर का पुराना ज़ख्म ना हरा होता !

एक परवाज़ मिला होता मेरे पंखों को,
मेरी साँसों पे जो उनका नहीं पहरा होता !

इतना नाज़ुक क्यों बनाया है रब ने मुझको,
दर्द आकर मुझ तलक ही क्यों दुहरा होता !

पूछें वो, मक़ता क्यों नहीं मेरी ग़ज़ल में?
नामुकम्मल तस्वीर का भला कोई चेहरा होता?

 

Glossary:

*परवाज़: Flight,                                              *मक़ता: The last sher of a Ghazal having the poet’s name,
*नामुकम्मल: Incomplete.

 

  • खूब सूरत उम्दा तरीन शब्दों की अदाकारी

  • Jayanthi

    you are so talented !!!