मेरे हिस्से का दर्द

tss hindi poetry चेहरा

 

पीड़ा झेलती मेरी अनुभूतियाँ
और झेलते हैं दर्द मेरे शब्द भी,
तब जाकर कहीं रचित होती है
मेरी व्यथा की कविता |

 

घुमड़ते मेघों – आषाढ़ बनकर ही रहो
सावन बनकर मत बरसो इन आँखों से,
रुपहले तारों से कह दो मत झाकेँ असमय
इन श्याम सुनहरी अलकों से |

 

क्यों शोषण करती हैं
पंच-इन्द्रियाँ सारी ऊर्जा
रहने दो बस एक स्पंदन मात्र
मेरे मन के लिए भी |

 

मेरे अंतर्मन पर पड़े निशान,
इतना मत टीसो की सारे आँसु चुक जाएं
ह्रदय ! तुम ह्रदय बनकर ही रहो,
मत बनो मात्र एक मांसपिंड |

 

कहीं दुःख का स्रोत सूख न जाये
जो संचित था वह चुक न जाये,
मत छीनो मेरे हिस्से का दर्द
क्योंकि रचना चाहती हूँ मैं भी एक कविता |

— संगीता

 

  • Thank you so much Archana 🙂 Means a lot. 🙂

  • दर्द की कविता में जो रोमांच है तो और किसी में नहीं। बस उसके लिए कवि / कवित्री को खुद अपना दर्द घोलना पड़ता है। एक सुझाव – चौथे छंद की अंतिम पंक्ति में आप महज़ की जगह मात्र प्रयोग कर सकते थे। इतनी शुद्ध हिंदी में उर्दू का एक शब्द थोड़ा अजीब सा लगा। और कवितायेँ लिखिए, पद कर अच्छा लगता है ।

    • आपका सुझाव बिल्कुल सही है | मैंने संशीधन कर दिया | कविता का इतने ध्यान से पढ़ने और इतनी अच्छी प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत धन्यवाद | आशा है आप आगे भी मेरी रचनाएँ पढ़कर अपने विचार प्रकट करते रहेंगे | 🙂

  • DEESHANI BATRA (DB)

    The words express such strong emotions of pain.. Beautiful composition, Ma’am 🙂

    • Thank you so much Deeshani. It’s feels great being appreciated by the youngsters. Welcome back on TSS. 🙂 <3

  • Pain encapsulated in poetry touches the core. Beautiful Sangeeta!

    • Thank you so much Somali. Means a lot when comes from you. 🙂 <3

  • Purba Chakraborty

    I loved the 2nd paragraph the most. You have so skillfully used the 2 monsoon seasons as a metaphor in your poem, Ma’am.
    Could relate to this poem a lot, because every poet makes his/her pain flow from heart to the paper through words drenched with emotions.
    Your poetries always soothe my heart and so I’m a big fan of your poems.

    • Ah, and this was the comment I was waiting for, since I posted this poem. Being appreciated by you is a real honour for me. And yes, every poet possesses hisher own share of pain, and that’s the true reason of their existence. Thank you so much dear Purba. Love you. 🙂 <3

  • Rajeev Moothedath

    Loved it for its simplicity, flow ability to touch the heart!

  • Indrani

    Nice expression of emotions. 🙂

  • MS Mahwar

    Beautiful creation!