अक्स

अक्स और आँखें

[dropcap]W[/dropcap]hen she was born,everyone said that she didn't look like me! But I made her my replica with time. :-) This poem is dedicated to my daughter [highlight]Maitreni[/highlight]. जब तुम आई, कहा सबने मेरा अक्स नहीं दिखता तुममें | मुस्कान तुम्हारी मुझ सी नहीं और आँखों में थे भाव नए,...Read More
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रात की स्याही

  बोझिल शामें, ऊंघती रातें................, आहत आँखों की साज़िश से हर साँस बिखरती है, कतरा-कतरा होकर मेरी आवाज़ बहकती है, रात मुझसे ही होकर हर रात गुज़रती है,   फ़िर भी मेरी आँखों में नहीं नींद बसती है |    कानों को बींधता है जब सन्नाटे का शोर, जिस ओर मुझे...Read More
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मेरे हिस्से का दर्द

  पीड़ा झेलती मेरी अनुभूतियाँ और झेलते हैं दर्द मेरे शब्द भी, तब जाकर कहीं रचित होती है मेरी व्यथा की कविता |   घुमड़ते मेघों - आषाढ़ बनकर ही रहो सावन बनकर मत बरसो इन आँखों से, रुपहले तारों से कह दो मत झाकेँ असमय इन श्याम सुनहरी अलकों...Read More