Thursday , 25 May 2017
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एक शिकायत: Ghazal

The Style Symphony

हर सितम हम सह गए, पर सिसकियों की भी इजाज़त ना मिली, अश्कों का दरिया मिला, दामन भिगोने की नज़ाकत ना मिली | आज हर चेहरा यहाँ ओढ़े हुए, मासूमियत का है नक़ाब, यह शरीफों का जहाँ, पर देखने को भी शराफ़त न मिली | कोई नाउम्मीदगी भी दे ना पाई थी इतना ग़म हमें, एक ही ग़म है हमें कि, आपकी नज़रे-इनायत ना मिली | आपका ख़त क्या मिला, शिकवों की वो लम्बी सी फ़ेहरिस्त थी, लाख़ हम ढूँढा ... Read More »

तमाम रात : Ghazal

तमाम रात

It’s bliss for an insomniac like me, to experience the dawn first, before the whole world does. But as all good things come with a price, I pay it with those sleepless nights draped with melancholy; yet the opportunist me craves fame out of that. Here, the bewildered insomniac expresses her gloom through this Ghazal. ~ Ghazal ~                                             ... Read More »

फ़ना के बाद: Ghazal

tss hindi poetry

अश्के-सागर में डूबने से ज़रा शोर तो होगा, मेरी इस ख़ुदकुशी पे रोया कोई और तो होगा | रास्ते सुनसान हैं, मेरी मंज़िल भी दूर है, सांस लेने को बियाबां में कहीं ठौर तो होगा | दुश्मनी ही सही, कोई तो रिश्ता हो कम से कम, दुश्मन हुआ तो क्या, किया गौर तो होगा | मेरा हर एक आंसू है मेरी ख़ामोशी की जुबां, लफ़्ज़ों नहीं पर अश्कों में वो ज़ोर तो होगा | एक ख्वाहिश थी लिख सकूँ, अपनी ख्वाहिशों ... Read More »

हसरतें: Ghazal

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कम से कम हमसे किसी को कुछ गिला तो है, शुक्र है कि आज कोई ग़ुल खिला तो है | माना कि इस तरफ नहीं था रुख़ हवाओं का, एक ही सही, कोई पत्ता हिला तो है | हमसफ़र नहीं तो क्या, तकदीर है मेरी, बेवफ़ा भी संग, दो कदम चला तो है | लाख खुद सितम किया, पर आपका ये दिल दूसरे सितमगरों से कुछ जला तो है | क्या पता था, आपकी चाहत है बेबसी, ये नया राज़ आज ... Read More »

मंज़िलें: Ghazal

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वक़्त ने करवट बदली और आईने बदल गए, चेहरे के शिकन बदले, ज़िन्दगी के पैमाने बदल गए | कुछ इस तरह से हम लिखते रहे रात भर की सुबह हुई और लफ़्ज़ों के मायने बदल गए | मीलों चले हम अपनी हसरतों के संग-संग, हम देखते ही रह गए और वो सामने बदल गए | स्याही से लिखे हर्फ़, ज़िन्दगी के गीत थे, सुर भी सजे थे, फिर भी  अफ़साने  बदल गए | बेघर हमे किया और हुए वो बेखबर, ... Read More »

ख़्वाहिशें: Ghazal

tss hindi poetry

कहने को बहुत कुछ है, पर आग़ाज़ ना मिला पंख हैं अब भी मगर, परवाज़ ना मिला | बिखरे हुए सरगम मैं सजाती रही उम्र भर सुर तो हैं सजे हुए, पर साज़ ना मिला | हज़ार ख़्वाहिशें सिरहाने रख, सोयी थी कल रात, बस ज़माने को दिखाने का अंदाज़ ना मिला | बेतरतीब सुर सजा लिए मैंने करीने से पर आवाज़ से जो मिला दे आवाज़, ना मिला | शुक्रिया किया तेरा ऐ देने वाले ख़ुदा आँखों से ही ... Read More »

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