The Style Symphony

वो बात अब भी बाक़ी है : Ghazal

[caption id="attachment_5613" align="aligncenter" width="333"] PC: Pinterest[/caption] मेरे लफ़्ज़ों में अब भी वो ख़लिश बाक़ी है, कि उफ़ भी करूँ तो पिघलता है फ़लक.   डूबती शाम का अब भी वो पहर बाक़ी है, कि गर्द-ए-रहगुज़र घबराकर जाती है ठिठक.   उम्र-ए-दरिया में अब भी वो लहर बाक़ी है, वक़्त की...Read More
The Style Symphony

अस्मिता

  यथार्थ की अँधेरी, पथरीली कंदराओं में युगों से अभिशप्त, एकाकी मैं, तलाशती अपना अस्तित्व | अधूरी मैं, अधूरी मेरी यात्रा और एक अंतहीन मार्ग जहाँ  तमस की कौंध से चुंधियाती हैं आँखें |  कानों को बहरा करता है सन्नाटे का शोर, कलियाँ चुभती हैं और बींधती हैं मेरे रोमछिद्रों...Read More
shabd words शब्द

शब्द (Words)

Please... Sorry... Thank You...   .......the sweetest man-made gestures ever found in the world of words! Reciprocation of these beautiful words build strong relations. Words are the most powerful medium of communication in this era of social media as well as socialization in our own surroundings. Words can break the...Read More
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अनुभूति और अभिव्यक्ति

  कल्पनाओं के पाँखी उड़ गए संभावनाओं के पंख पसार बंजर मन की परती में अंकुरने से भावनाओं ने किया इन्कार यथार्थ की दुपहरी, बिखेर गयी धूप कर्कश जेठ सी वर्जनाओं में जकड़ी मैं बह न सकी, मुठ्ठी में बंद रेत सी अनुभूति, कोई नागफनी का पौधा नहीं और कांटे हैं...Read More
धुरी और परिपथ

धुरी और परिपथ

पृथ्वी का घूमना अपनी धुरी पर या फिर एक निश्चित परिपथ में परिक्रमा सूर्य की, — विज्ञान के इस सत्य को जीने की नियति है मेरी भी निरंतर.... अपनी अस्मिता की तलाश में आत्मकेन्द्रित होकर स्वयं की धुरी पर घूमना और कर्तव्यों की आकाशगंगा में नियति द्वारा तय एक अज्ञात,...Read More
ममता का आँचल

ममता का आँचल

ममता के आँचल से सींचा है किनारा, मृदुल जल के दर्पण में मिला है सहारा | उन्नति पर अग्रसर वो राह डगमगाती थी, डाँट से जब डरकर हर रूह काँप जाती थी, संध्या में दिया जलाकर किया जीवन जगमग सारा| पक्षियों के पर लगाकर दिया व्योम को स्वर्णिम तारा ||...Read More
अक्स

अक्स और आँखें

[dropcap]W[/dropcap]hen she was born,everyone said that she didn't look like me! But I made her my replica with time. :-) This poem is dedicated to my daughter [highlight]Maitreni[/highlight]. जब तुम आई, कहा सबने मेरा अक्स नहीं दिखता तुममें | मुस्कान तुम्हारी मुझ सी नहीं और आँखों में थे भाव नए,...Read More
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रात की स्याही

  बोझिल शामें, ऊंघती रातें................, आहत आँखों की साज़िश से हर साँस बिखरती है, कतरा-कतरा होकर मेरी आवाज़ बहकती है, रात मुझसे ही होकर हर रात गुज़रती है,   फ़िर भी मेरी आँखों में नहीं नींद बसती है |    कानों को बींधता है जब सन्नाटे का शोर, जिस ओर मुझे...Read More
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मेरे हिस्से का दर्द

  पीड़ा झेलती मेरी अनुभूतियाँ और झेलते हैं दर्द मेरे शब्द भी, तब जाकर कहीं रचित होती है मेरी व्यथा की कविता |   घुमड़ते मेघों - आषाढ़ बनकर ही रहो सावन बनकर मत बरसो इन आँखों से, रुपहले तारों से कह दो मत झाकेँ असमय इन श्याम सुनहरी अलकों...Read More
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सृजन का सच

हर सुबह जब झरता है पत्तों से अँधेरा हवा चुनती है बूँदें ओस की और, गूंजता है हवाओं में राग भैरव धूप की पहली, कुंवारी किरण भेदना चाहती है वातावरण में फैली वासना की गहरी धुंध; चाहती  हूँ मैं भी, बिखेर दूँ हर ओर ताज़ी सुगंध | पर, स्याह किरणों...Read More
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फ़ना के बाद: Ghazal

अश्के-सागर में डूबने से ज़रा शोर तो होगा, मेरी इस ख़ुदकुशी पे रोया कोई और तो होगा | रास्ते सुनसान हैं, मेरी मंज़िल भी दूर है, सांस लेने को बियाबां में कहीं ठौर तो होगा | दुश्मनी ही सही, कोई तो रिश्ता हो कम से कम, दुश्मन हुआ तो क्या,...Read More
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हौसलों की हार…

हौसलों के पंख लगाकर उड़ने की बातें करते थे हम कल तक, आतंक के अट्टहास तले, रेंगते, सरकते उन्ही हौसलों को देखा है अभी| रक्तरंजित सड़कों के बीच जीने की जद्दोज़हद में खिसकते, घिसटते उन्ही हौसलों को देखा है अभी| शवों के ढेर जिनपर होती नित नई राजनीति चिताओं पर...Read More
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हसरतें: Ghazal

कम से कम हमसे किसी को कुछ गिला तो है, शुक्र है कि आज कोई ग़ुल खिला तो है | माना कि इस तरफ नहीं था रुख़ हवाओं का, एक ही सही, कोई पत्ता हिला तो है | हमसफ़र नहीं तो क्या, तकदीर है मेरी, बेवफ़ा भी संग, दो कदम...Read More
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मंज़िलें: Ghazal

वक़्त ने करवट बदली और आईने बदल गए, चेहरे के शिकन बदले, ज़िन्दगी के पैमाने बदल गए | कुछ इस तरह से हम लिखते रहे रात भर की सुबह हुई और लफ़्ज़ों के मायने बदल गए | मीलों चले हम अपनी हसरतों के संग-संग, हम देखते ही रह गए और...Read More
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ख़्वाहिशें: Ghazal

कहने को बहुत कुछ है, पर आग़ाज़ ना मिला, पंख हैं अब भी मगर, परवाज़ ना मिला | बिखरे हुए सरगम मैं सजाती रही ताउम्र, सुर तो हैं सजे हुए, पर साज़ ना मिला | हज़ार ख़्वाहिशें सिरहाने रख, सोयी थी कल रात, बस ज़माने को दिखाने का अंदाज़ ना मिला...Read More