Sunday , 25 June 2017
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Tag Archives: modern poetry

I Didn’t listen To You Maa

godrej expert

I gazed into her seasoned eyes, She said, “A quick glance should suffice. But never-ever do this to anyone, Co’z your quietude isn’t meant to be gone. All you are deemed to behold down, So that you can ignore all frowns.” But I didn’t listen to my Maa I dared, stared all eyes and got stigma. She said, “You’re born to live for others, The one who only cares and mothers, Don’t dare ever think of yourself, But bend your ... Read More »

सृजन का सच

tss hindi poetry

हर सुबह जब झरता है पत्तों से अँधेरा हवा चुनती है बूँदें ओस की और, गूंजता है हवाओं में राग भैरव धूप की पहली, कुंवारी किरण भेदना चाहती है वातावरण में फैली वासना की गहरी धुंध; चाहती  हूँ मैं भी, बिखेर दूँ हर ओर ताज़ी सुगंध | पर, स्याह किरणों से कैसे लिखूँ सुनहरे छंद, कैसे कहूँ, किससे कहूँ, कि कविता हरी कोंपलों से फूटती है सड़े पत्तों के ढेर से नहीं, मंन जो बंधा है कोमल सुरों से “रॉक-रैप” ... Read More »

हौसलों की हार…

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हौसलों के पंख लगाकर उड़ने की बातें करते थे हम कल तक, आतंक के अट्टहास तले, रेंगते, सरकते उन्ही हौसलों को देखा है अभी| रक्तरंजित सड़कों के बीच जीने की जद्दोज़हद में खिसकते, घिसटते उन्ही हौसलों को देखा है अभी| शवों के ढेर जिनपर होती नित नई राजनीति चिताओं पर सिंकती राजनीतिज्ञों की रोटी शहीदों की चिताओं तले सिसकते, सुबकते उन्ही हौसलों को देखा है अभी| थर्राते हाथों से शवों के ढेर में ढूंढते अपने अपनों को भयाक्रांत चेहरों की ... Read More »

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