tss hindi poetry

रात की स्याही

बोझिल शामें, ऊंघती रातें................, आहत आँखों की साज़िश से हर साँस बिखरती है, कतरा-कतरा होकर मेरी आवाज़ बहकती है, रात मुझसे ही होकर हर रात गुज़रती है,   फ़िर भी मेरी आँखों में नहीं नींद बसती है |    कानों को बींधता है जब सन्नाटे का शोर, जिस ओर मुझे बुलाता,...Read More
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फ़ना के बाद: Ghazal

अश्के-सागर में डूबने से ज़रा शोर तो होगा, मेरी इस ख़ुदकुशी पे रोया कोई और तो होगा | रास्ते सुनसान हैं, मेरी मंज़िल भी दूर है, सांस लेने को बियाबां में कहीं ठौर तो होगा | दुश्मनी ही सही, कोई तो रिश्ता हो कम से कम, दुश्मन हुआ तो क्या,...Read More