The Style Symphony

वो बात अब भी बाक़ी है : Ghazal

[caption id="attachment_5613" align="aligncenter" width="333"] PC: Pinterest[/caption] मेरे लफ़्ज़ों में अब भी वो ख़लिश बाक़ी है, कि उफ़ भी करूँ तो पिघलता है फ़लक.   डूबती शाम का अब भी वो पहर बाक़ी है, कि गर्द-ए-रहगुज़र घबराकर जाती है ठिठक.   उम्र-ए-दरिया में अब भी वो लहर बाक़ी है, वक़्त की...Read More
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फ़ना के बाद: Ghazal

अश्के-सागर में डूबने से ज़रा शोर तो होगा, मेरी इस ख़ुदकुशी पे रोया कोई और तो होगा | रास्ते सुनसान हैं, मेरी मंज़िल भी दूर है, सांस लेने को बियाबां में कहीं ठौर तो होगा | दुश्मनी ही सही, कोई तो रिश्ता हो कम से कम, दुश्मन हुआ तो क्या,...Read More
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हसरतें: Ghazal

कम से कम हमसे किसी को कुछ गिला तो है, शुक्र है कि आज कोई ग़ुल खिला तो है | माना कि इस तरफ नहीं था रुख़ हवाओं का, एक ही सही, कोई पत्ता हिला तो है | हमसफ़र नहीं तो क्या, तकदीर है मेरी, बेवफ़ा भी संग, दो कदम...Read More
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मंज़िलें: Ghazal

वक़्त ने करवट बदली और आईने बदल गए, चेहरे के शिकन बदले, ज़िन्दगी के पैमाने बदल गए | कुछ इस तरह से हम लिखते रहे रात भर की सुबह हुई और लफ़्ज़ों के मायने बदल गए | मीलों चले हम अपनी हसरतों के संग-संग, हम देखते ही रह गए और...Read More
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ख़्वाहिशें: Ghazal

कहने को बहुत कुछ है, पर आग़ाज़ ना मिला, पंख हैं अब भी मगर, परवाज़ ना मिला | बिखरे हुए सरगम मैं सजाती रही ताउम्र, सुर तो हैं सजे हुए, पर साज़ ना मिला | हज़ार ख़्वाहिशें सिरहाने रख, सोयी थी कल रात, बस ज़माने को दिखाने का अंदाज़ ना मिला...Read More